समाचार शगुन उत्तराखंड
शिक्षक दिवस वैसे तो शिक्षकों के सम्मान का दिवस होता है पर टी ई टी की बाध्यता के कारण एल टी से प्रवक्ता पदोन्नति में आ रही अड़चन ने इस दिन भी शिक्षकों को आंदोलित होने को मजबूर कर दिया। राजकीय शिक्षक संघ की मंडलीय कार्यकारणी के आह्वान पर शिक्षकों ने आज शनिवार को खंड शिक्षा अधिकारी रामनगर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में एल टी से प्रवक्ता पद पर पदोन्नति हेतु टी ई टी की बाध्यता को समाप्त कर तत्काल पदोन्नतियां किए जाने हेतु विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किए जाने की मांग की गई। खंड शिक्षा अधिकारी की गैर मौजूदगी में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी सुरेश चंद्र रावत ने ज्ञापन लिया। ज्ञापन स्थल पर शिक्षकों को संबोधित करते हुए संगठन के पूर्व मंडलीय मंत्री नवेंदु मठपाल ने कहा 2014 से पहले नियुक्त शिक्षकों को अब टी ई टी करने का आदेश निर्गत करना दुर्भाग्यपूर्ण है।शिक्षकों की सेवा शर्तें बदल दी गईं। टीईटी-II एलटी के विषय-विशेष कार्य से मेल नहीं खाता। एलटी माध्यमिक संवर्ग है। अनुभवी शिक्षकों को अब नई परीक्षा की तैयारी करनी पड़ रही है जबकि वे वर्षों से सफलतापूर्वक पढ़ा रहे हैं। बिना टीईटी के पदोन्नति और भविष्य की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। जिन शिक्षकों ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा विभाग में अपनी योग्यता से शिक्षा व्यवस्था को सँवारने में लगा दिया है, अचानक उनकी पात्रता का आंकलन एक वस्तुनिष्ठ परीक्षा के आधार पर करना और सेवा समाप्त करने की शर्त थोपना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि मानवाधिकारों का भी हनन है। पूर्व ब्लाक अध्यक्ष कोटाबाग खीम सिंह रजवार ने कहा कि वर्षों की निष्ठापूर्ण सेवा को एक परीक्षा के नतीजे से जोड़कर एल टी शिक्षकों की आजीविका और सम्मान को संकट में डालना संवैधानिक मूल्यों के भी विरुद्ध है। एलटी संवर्ग पर टीईटी की बाध्यता मुख्य रूप से 2014 के नियमावली संशोधन और उसके बाद की व्याख्या का परिणाम है। यह न तो मूल सेवा नियमों के अनुरूप है और न ही शैक्षणिक दृष्टि से न्यायसंगत। इस मौके पर पूर्व ब्लाक उपाध्यक्ष बालकृष्ण चंद, नरेंद्र पटवाल, सुरेंद्र कुमार, देवेंद्र भाकुनी, सिद्धेश्वर चौधरी, मृदुला आर्य, रमेश बिष्ट, दिनेश रावत मौजूद रहे।
