समाचार शगुन हल्द्वानी उत्तराखंड
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने निगम प्रबंधन को दिए गए आंदोलन नोटिस के प्रथम चरण के क्रम में बुधवार को काठगोदाम आरएम आफिस में कर्मचारियों ने धरना दिया। धरने के दौरान कर्मचारियों ने लम्बित वेतन के तत्काल भुगतान, पूर्व में प्रबंधन एवं संगठन के मध्य हुई वार्ताओं एवं कार्यवृत्त में लिए गए निर्णयों के समयबद्ध क्रियान्वयन तथा निगम की आर्थिक एवं संचालन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की मांग की। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि जुलाई एवं अगस्त माह का वेतन लम्बित होना कर्मचारियों के लिए अत्यंत गंभीर स्थिति है। कर्मचारियों की आर्थिक कठिनाइयों को देखते हुए लम्बित वेतन का तत्काल भुगतान किया जाए तथा भविष्य में प्रत्येक माह की 07 तारीख तक वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए। धरना देने वालों में परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष जगदीश कांडपाल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष आन सिंह जीना, हल्द्वानी शाखा के अध्यक्ष कौशल जोशी, श्याम सिंह शाही, मनोज मनराल, विजय चौहान, दिनेश भंडारी, योगेश जोशी, मलकीत सिंह, राजेंद्र, सुरेंद्र रावत, हिमांशु पांडे, जगदीश पुजारी आदि शामिल रहे। परिषद के प्रांतीय आह्वान पर टनकपुर और देहरादून रीजन में भी सांकेतिक धरना दिया गया।
यह मांगें उठाईं
1. कर्मचारियों के लम्बित वेतन का तत्काल भुगतान किया जाए तथा भविष्य में प्रत्येक माह की 07 तारीख तक वेतन सुनिश्चित किया जाए।
2. प्रबंधन एवं संगठन के मध्य पूर्व में हुई वार्ताओं एवं कार्यवृत्त में लिए गए निर्णयों का समयबद्ध एवं प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए।
3. उत्तराखण्ड परिवहन निगम के **बस बेड़े को तत्काल सुदृढ़** किया जाए तथा ई-बसों की व्यवस्था करते हुए मिशन मोड में बसों की संख्या बढ़ाई जाए।
4. निगम की परिसम्पत्तियों पर **सोलर पैनल स्थापित कर ऊर्जा व्यय कम** किया जाए तथा निगम की आय बढ़ाने के प्रभावी उपाय किए जाएं।
5. **उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के साथ हुए पारस्परिक परिवहन करार की डिपोवार समीक्षा** कर उत्तराखण्ड परिवहन निगम को समान एवं न्यायसंगत संचालन सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
6. **पर्यटक वाहन परमिट की आड़ में होने वाले अवैध स्टेज कैरिज संचालन पर रोक** लगाई जाए तथा नियमित एवं प्रभावी प्रवर्तन अभियान चलाया जाए, जिससे निगम के वैध राजस्व की सुरक्षा हो सके।
7. प्रत्येक डिपो में अधिकारियों की **स्पष्ट, मापने योग्य एवं परिणाम आधारित जवाबदेही** तय की जाए, ताकि बसें अनावश्यक रूप से खड़ी न रहें तथा संचालन किलोमीटर एवं आय में वृद्धि हो।
8. भ्रष्टाचार अथवा अनियमितताओं में संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए तथा लगातार डिपो की आय एवं संचालन में गिरावट लाने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
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केवल चालक-परिचालकों पर कार्रवाई नहीं, अधिकारियों की भी तय हो जवाबदेही
परिषद के प्रदेश महामंत्री दिनेश पन्त ने कहा कि निगम की आर्थिक एवं संचालन संबंधी समस्याओं के लिए केवल चालक एवं परिचालकों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। जहां कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाती है, वहीं निगम की आय, संचालन, बसों की उपलब्धता, किलोमीटर एवं राजस्व में लगातार गिरावट के लिए संबंधित अधिकारियों की भी समान रूप से जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी को अनावश्यक रूप से निशाना बनाना नहीं है, बल्कि निष्पक्ष जवाबदेही और निगम हित में प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित कराना है।
परिवहन मंत्री से हस्तक्षेप की मांग
दिनेश पन्त ने संगठन के मांग पत्र के संबंध में परिवहन मंत्री से प्रभावी हस्तक्षेप किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि निगम की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए केवल लम्बित वेतन का भुगतान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निगम की आर्थिक एवं संचालन व्यवस्था में दीर्घकालिक सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से निगम के बस बेड़े को तत्काल सुदृढ़ करने नई एवं ई-बसों की संख्या बढ़ाने, राजस्व के स्रोत मजबूत करने तथा अवैध संचालन से निगम को हो रहे राजस्व नुकसान पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की।
निगम बंद करने के लिए नहीं, निगम बचाने के लिए संघर्ष
परिषद ने स्पष्ट किया कि संगठन का आंदोलन **निगम अथवा सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बंद करने के उद्देश्य से नहीं है। संगठन चाहता है कि उत्तराखण्ड परिवहन निगम आर्थिक रूप से मजबूत हो, उसकी अधिक से अधिक बसें सड़क पर संचालित हों, यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिले और निगम का वैध राजस्व सुरक्षित रहे।
संगठन ने आंदोलन के दौरान निगम एवं यात्रियों के हितों का ध्यान रखने तथा आवश्यक बस संचालन प्रभावित न होने देने की भी अपील की है।
16 सितम्बर को होगा द्वितीय चरण का आंदोलन
प्रदेश महामंत्री दिनेश पन्त ने कहा कि 09 सितम्बर का सांकेतिक धरना प्रबंधन को चेताने और संगठन की एकजुटता का पहला सार्वजनिक संदेश है।
