समाचार शगुन हल्द्वानी उत्तराखंड
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देशों के अनुपालन में उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति द्वारा 12 सितंबर 2026 (शनिवार) को उच्च न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का व्यापक स्तर पर आयोजन किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य वादकारियों को उनके लंबित मुकदमों एवं विवादों को आपसी समझौते और सुलह के माध्यम से त्वरित गति से निपटाने का एक सशक्त मंच प्रदान करना है। इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए नेहा कुशवाहा सचिव उत्तराखंड उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, उच्च न्यायालय परिसर, नैनीताल द्वारा अवगत कराया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में दीवानी और फौजदारी दोनों प्रकार के शमनीय (Compoundable) मामलों को सुनवाई के लिए रखा जाएगा। प्रमुख श्रेणियां में –शमनीय आपराधिक मामले: अदालत में लंबित विभिन्न शमनीय आपराधिक प्रकरण,परक्राम्य लिखत अधिनियम (N.I. Act) की धारा 138: चेक बाउंस से संबंधित मामले, बैंक ऋण एवं वित्तीय विवाद: बैंकों, वित्तीय संस्थानों और व्यक्तिगत ऋणधारकों से जुड़े रिकवरी व वित्तीय मामले। श्रम एवं रोजगार विवाद: औद्योगिक विवाद, वेतन, छंटनी और अन्य श्रम मामलों से जुड़े प्रकरण। बिजली और पानी के बिल: बिजली और पानी के बिलों के बकाए से संबंधित लंबित मामले। पारिवारिक एवं वैवाहिक विवाद: आपसी सहमति से सुलझने योग्य वैवाहिक व भरण-पोषण से जुड़े पारिवारिक विवाद। भूमि अधिग्रहण, प्रतिकर एवं दीवानी मामले: किराया, इंजंक्शन वाद तथा मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) से संबंधित मामले। अन्य दीवानी मामले: आपसी समझौते के योग्य अन्य सभी प्रकार के दीवानी मुकदमे। उन्होंने अवगत कराया कि राष्ट्रीय लोक अदालतों में मामलों के निस्तारण के अनेक लाभ हैं, जिसमें त्वरित और अंतिम न्याय, मामलों का बिना किसी लंबी कानूनी प्रक्रिया के तुरंत और हमेशा के लिए समाधान। धन और समय की बचत: बार-बार की तारीखों और वकीलों की लंबी फीस के खर्च से मुक्ति। पूर्ण संतुष्टि, दोनों पक्षों की सहमति से फैसला होने के कारण भविष्य में किसी अपील या विवाद की गुंजाइश नहीं रहती। फीस की वापसी, लोक अदालत में मामला सुलझने पर वादकारियों को कोर्ट फीस (Court Fee) रिफंड मिल जाती है। आपसी सौहार्द, कटुता समाप्त होती है और दोनों पक्षों के बीच मधुर संबंध स्थापित होते हैं। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि जो पक्षकार या अधिवक्ता शारीरिक रूप से उपस्थित होने में असमर्थ हैं, वे माननीय उच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से वर्चुअल (Virtual) रूप से भी इस राष्ट्रीय लोक अदालत की कार्यवाही में जुड़ सकते हैं। उन्होंने वादकारियों और अधिवक्ताओं से अपील की है कि जो पक्षकार अपने मामलों को आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारित कराना चाहते हैं, वे लोक अदालत से पूर्व संबंधित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध (List) अवश्य करा लें, ताकि समय रहते सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा सकें। अधिक जानकारी या अपने मामलों की सूची के संबंध में सहायता के लिए, वादकारी उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
