समाचार शगुन उत्तराखंड
रामनगर के राजकीय इंटर कालेज ढेला में हिंदी के वरिष्ठ कवि त्रिलोचन को उनकी 109 वीं जयंती एवं छायावाद के कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल को उनकी 107 वीं जयंती पर याद किया गया।अंग्रेजी प्रवक्ता नवेंदु मठपाल ने कवि त्रिलोचन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हिन्दी के प्रगतिशील काव्यधारा के प्रमुख स्तंभ और ‘सोनेट’ (Sonet) छंद के सिद्धहस्त कवि त्रिलोचन शास्त्री का मूल नाम वासुदेव सिंह था। उनका जन्म 20 अगस्त 1917 को सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश के कटघरा गाँव में हुआ था। उन्हें नागार्जुन और शमशेर बहादुर सिंह के साथ आधुनिक हिंदी कविता की ‘प्रगतिशील त्रयी’ का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। 9 दिसंबर 2007 को उनका निधन हुआ।धरती , गुलाब और बुलबुल, ताप के ताए हुए दिन, उस जनपद का कवि हूँ, शब्द, अरधान, तुम्हें सौंपता हूँ, चैती उनके कविता संग्रह हैं जबकि देशकाल कहानी संग्रह है।
हिमवंत कवि चंद्रकुंवर बर्तवाल का जन्म मंदाकिनी घाटी के मालकोटी गांव (वर्तमान में रुद्रप्रयाग जिला) में 20 अगस्त 1919 में हुआ।
1941 में उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय में एमए में प्रवेश लिया, जहां उनका परिचय छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत, निराला और महादेवी वर्मा से हुआ. जिसके बाद से कुंवर की कविताओं में छायावाद की झलक भी दिखने लगी. चंद्र कुंवर बर्त्वाल ने हिमालय, प्रकृति के अलावा छायावाद के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन, छुआछूत और साम्प्रदायिक उन्माद पर प्रगतिवादी रचनाएं लिखीं.1947 में मात्र 28 साल की उम्र में हिमालय के पुत्र ने हिमालय की गोद में ही दम तोड़ दिया। इस मौके पर बच्चों द्वारा दोनों ही कवियों की कविताओं का पाठ करने के साथ साथ कविता पोस्टर भी बनाए गए। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य मनोज जोशी,नवेंदु मठपाल, हरीश कुमार, शैलेंद्र भट्ट,दिनेश निखुरपा, बालकृष्ण चंद,संजीव कुमार, जया बाफिला, उषा पवार, हेमलता जोशी,पद्मा, नरेश कुमार मौजूद रहे।
