समाचार शगुन उत्तराखंड
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के डाक्टर और उनके भाई की आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जेके उपाध्याय की खंडपीठ ने डा.यतीन्द्र मोहन बहुगुणा और उनके भाई समोज बहुगुणा को बाल शोषण जैसे सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि वैवाहिक विवादों में व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने के लिए बच्चों को घसीटकर बाल संरक्षण कानूनों का दुरुपयोग करना चिंताजनक है। वाराणसी की एक निचली अदालत ने इससे पहले दोनों भाइयों को पाक्सो अधिनियम और अन्य धाराओं के तहत कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
