लस्का कमर बांधा गा 84वीं जयंती पर याद किए गए हीरा सिंह राणा

समाचार शगुन  उत्तराखंड

कुमाउनी कविता और गीतों के प्रमुख कवि,गायक हीरा सिंह राणा को आज उनकी 84 जयंती पर उनकी कविताओं, गीतों के साथ याद किया गया। उत्तराखंडी लोकभाषाओं की समृद्धि के लिए कार्य कर रही संस्था दुदबोली की ओर से लखनपुर स्पोर्ट्स क्लब रामनगर में हुए इस रंगारंग कार्यक्रम में वक्ताओं ने हीरा सिंह राणा के कवित्व पक्ष पर विस्तार से बात रखते हुए वाद्ययंत्रों के साथ उनके गीतों की शानदार प्रस्तुति की। इस मौके पर हीरा सिंह राणा के कवि पक्ष पर बात रखते हुए प्रो गिरीश चंद्र पंत ने कहा राणा के गीत और कविताएं प्रकृति का शानदार चित्रण करते हुए हमेशा ही आम आदमी के दुख दर्द को व्यक्त करती हैं।उनकी कविताओं में भोगे हुए जीवन का यथार्थ है।आम लोगों के सरोकार में रची गई उनकी रचनाएं व्यापक आयाम लिए हुए हैं। हीरा सिंह राणा सिर्फ गायक नहीं थे बल्कि लोक की व्यापक चेतना उनके भीतर थी। जो समय-समय पर गीतों के रूप में समाज का मार्गदर्शन करती रही . अपनी जड़ों के प्रति अनुराग उनके गीत …. “म्यर मानिले डानी त्यर बलांईं ल्यू” मे दिखता है तो पहाड़ की जीवन शैली में संघर्ष और हिम्मत का पुट होना जरूरी है। जो आपको जिंदा रखता है . इसे व्यक्त करते हुए उनका ऐतिहासिक गीत है.. “लसका कमर बांधा , हिम्मतक सांथा. फिर भोला उज्याउ होली कांले रोली राता .. ”
पहाड़ की हकीकत को बयां करता उनका यह गीत उत्तराखंडी समाज का एक बेहतरीन आकलन करता है…
“त्यर पहाड,म्यर पहाड,
होय दु;खो क ड्यर पहाड़ .
बजुर्गो ले जोड पहाड.
राजनीति ले जोड़ पहाड.
ठेकेदारों ले तोड पहाड.
नांतिनो ले छोड़ पहाड.”
इस मौके पर तुषार बिष्ट,अमित लोहनी,निषाद खान, हर्षित सती,प्रांजलएवं ललित बिष्ट द्वारा हीरा सिंह राणा की हम पीड़ लुकाने रया,आजादी मिली रे, हे जनम भूमि,
टिमासैल हिटणियां की संगीतमय प्रस्तुति की गई। शिक्षक महेंद्र आर्य ने आहा रे जमाना गा माहौल को खुशनुमा कर दिया।कार्यक्रम का अंत लस्का कमर बाँधा के सामूहिक गायन के साथ हुआ।
इस मौके पर कार्यक्रम आयोजक नवेंदु मठपाल,हर्षित सती, प्रायंजल,निषाद खान,प्रभात धर्मानी, सुभाष गोला,ओमप्रकाश रोत, जिला पंचायत सदस्त हेम नैनवाल,मोहन कांडपाल,जगदीश तिवारी,महेंद्र रावत, के डी करगेती ,सिद्धार्थ,प्रसून,दीप मेलकानी,चंद्रशेखर जोशी,प्रमोद उपाध्याय मौजूद रहे।