समाचार शगुन उत्तराखंड

उत्तराखंडी लोक साहित्य की चिनाण पछयाण को रेखांकित करने एवं संरक्षण के लिए प्रयासरत संस्था दुदबोलि की पहल पर आज रामनगर में उत्तराखंडी लोककवियों की कविताओं,गीतों की संगीतमय प्रस्तुति की गई।उत्तराखंड में पहली बार हुए इस अनूठे कार्यक्रम में प्रतिभागियों द्वारा कुमाउनी,गढ़वाली,जौनसारी,नेपाली के साथ साथ रं जौहरी लोकभाषा के मूर्धन्य प्रतिष्ठित के कवियों की कविताओं की संगीतमय प्रस्तुति की गई। उत्तराखंडी लोककवियों की कविताओं,गीतों की संगीतमय प्रस्तुति उत्तराखंड में पहली बार आज *रामनगर* में…. “गीत पुराणा, कंठ नया..अनेकानेक स्थानीय कलाकारों के साथ साथ आज के कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण लोकगीतों के चर्चित गायक गणेश मर्तोलिया (“हिमाली हवा शु रू रु….पंचाचुली”) एवं रं,जौहरी लोक गीतों के गायक एवं अन्य सम्मानित लोक गायक एवं कवि कुमाऊँनी वरिष्ठ कवि जगदीश जोशी,जगमोहन रौतेला रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ नेकी की दीवार के संयोजक तारा घिल्डियाल,वरिष्ठ पत्रकार विनोद पपने, डा अशोक जोशी,नंदिनी मठपाल, एड बालम बिष्ट ने संयुक्त रूप से किया। प्रो गिरीश चंद्र पंत,नवेंदु मठपाल ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर बातचीत रखते हुए कहा कि हमारा प्रयास है लोककवियों के गीत जन जन तक पहुंचें।
बलवन्त सिंह ह्याँकी और संतोष कुँवर ने रं जन, और रं ल्वो (रं बोली) का परिचय देते हुए उस बोली के गीत प्रस्तुत किया।अनन्या,विहान अग्रवाल,कल्पना रावत,पवन कुमार,हरीश आर्या हरिमन, सुमन जोशी
,महेंद्र आर्या,गणेश पंत, डा अशोक जोशी,सी पी खाती ने कविताओं की प्रस्तुति की जबकि तुषार बिष्ट,ललित बिष्ट,प्रभात नेगी,गिटार पर जतिन जोशी, तबले पर प्रगति पांडे,ड्रम पर निषाद खान,सी पी खाती,बालम बिष्ट ने वाद्य यंत्रों से साथ संगत किया।20 से अधिक विद्यालयों के बच्चों ने कार्यक्रम में प्रतिभाग कियानसचालन निखिलेश उपाध्याय, डा प्रियदर्शन ने संयुक्त रूप से किया।इस मौके पर दिनेश रावत,नवेंदु मठपाल,सुरेन्द्र लाल,रमेश बिष्ट,जितेंद्र बिष्ट,देवेंद्र भट्ट,प्रकाश फुलेरिया,पुष्पा मठपाल,विजेता बिष्ट, डा धनेश्वरी घिल्डियाल,सुभाष गोला, हेम पांडे,नवीन तिवारी,दिनेश जोशी,प्रणय श्रीवास्तव मौजूद रहे।
