हल्दूचौड़ में हॉस्टल के बच्चों ने अगस्त क्रांति दिवस एवं काकोरी कांड के संग्रामियों को किया याद

समाचार शगुन उत्तराखंड 

हल्दूचौड़ में हॉस्टल के बच्चों ने अगस्त क्रांति दिवस एवं काकोरी कांड के संग्रामियों को किया याद

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रचनात्मक शिक्षक मंडल उत्तराखंड की पहल पर स्कूली बच्चों को आजादी के आंदोलन के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराने के क्रम में आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास हल्दूचौड़ के बच्चों द्वारा अगस्त क्रांति दिवस एवं काकोरी कांड के संग्रामियों को याद किया गया।
बच्चों को जानकारी देते हुए वार्डन डा हिमांशु पांडे ने बताया कि महात्मा गांधी को पुणे की आगा खां पैलेस में कैद कर लिये जाने के बाद युवा नेत्री अरुणा आसिफ अली ने 9 अगस्‍त 42 को मुम्‍बई के ग्‍वालिया टैंक मैदान में तिरंगा फहराकर भारत छोड़ो आंदोलन का शंखनाद किया। पूरे देश में अंग्रेजों के खिलाफ जबरदस्त आंदोलन शुरू हो गया। इस आंदोलन में अंग्रेजी हुकूमत के ताबूत में आखिरी कील का काम किया। आज के दिन को अगस्त क्रांति दिवस के रूप में भी याद किया जाता है।रचनात्मक शिक्षक मंडल संयोजक नवेंदु मठपाल ने सम्बोधित करते हुए कहा क़ि आज ही के दिन 9 अगस्त 1925 को हुए काकोरी ट्रेन एक्शन का समूचे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक विशेष महत्व है। यह केवल ब्रिटिश सरकार पर ही राजनीतिक हमला नही था, बल्कि 1921 के असहयोग आंदोलन के स्थगन से उपजे राजनीतिक शून्य को भरने का भी प्रयाश था। साथ ही इस एक्शन की एक सकारात्मक भूमिका औऱ भी थी क़ि तत्कालीन साम्प्रदयिक माहौल के खिलाफ राष्ट्रीयता को बढ़ावा देने में इससे भारी प्रेरणा मिली। रामप्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह औऱ राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी के साथ साथ अशफाकउल्ला का बलिदान भारतीय जनता के लिए अविस्मरणीय हो उठा। अपने पत्रों, बयानों ओर नज्मों से उन्होंने देश को नई राह पकड़ने जी प्रेरणा देते हुए क्रांतिकारी आंदोलन में पहली बार समाजवादी सिद्धांतों की हिमायत की। इस मौके पर बच्चों द्वारा आजादी के दौर के गीत एवं तराने गाए गए एवं आजादी के संग्रामियों के चित्र बनाए गए। बच्चों को अगस्त क्रांति दिवस एवं काकोरी ट्रेन एक्शन से संबंधित डाक्यूमेंट्रीज भी दिखाई गई। इस मौके पर वार्डन हिमांशु पांडे, नवेंदु मठपाल, कार्यालय प्रभारी कैलाश चंद्र सिंह, प्रशिक्षक हेम पाल सहित मार्गदर्शको मंजू मिश्रा, ममता शर्मा, भावना मेहता एवं छात्रावास हाउस कैप्टेन दिव्यांशु, चंद्र प्रकाश, हर्षित, जय फत्याल, ऋतिक कुमार आदि ने योगदान दिया.

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