धामी सरकार की पहल लाई रंग, कुमाऊं के इस गांव में बॉयोमेडिकल कंट्रोल यूनिट किसानों को समर्पित

समाचार शगुन हल्द्वानी उत्तराखंड 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को जनपद नैनीताल में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। विकासखण्ड कोटाबाग के ग्राम गिनती गांव में नाबार्ड के वित्तीय सहयोग से स्थापित *जैव नियंत्रण उत्पादन इकाई (Bio-Control Production Unit)* किसानों के लिए समर्पित कर दी गई है। यह पहल प्रदेश में टिकाऊ कृषि, पर्यावरण संरक्षण तथा किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के कीट विज्ञान विभाग एवं कास्तकार विकास समिति के संयुक्त प्रयासों से स्थापित इस परियोजना की कुल लागत *₹43.57 लाख है, जिसमें नाबार्ड द्वारा ₹30.90 लाख का अनुदान उपलब्ध कराया गया है।* परियोजना का उद्देश्य किसानों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण जैव नियंत्रण एजेंट उपलब्ध कराना, रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करना तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना है। इस परियोजना के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल कीट प्रबंधन तकनीकों का लाभ मिलेगा। स्थानीय स्तर पर तैयार किए जाने वाले जैव नियंत्रण उत्पाद खेती की लागत कम करने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, सुरक्षित खाद्य उत्पादन एवं पर्यावरण संतुलन को भी मजबूत करेंगे। इससे प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के राज्य सरकार के प्रयासों को नई गति मिलेगी। परियोजना के अंतर्गत किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण, खेतों में प्रदर्शन कार्यक्रम, तकनीकी मार्गदर्शन तथा जैव नियंत्रण उत्पादों के उपयोग की वैज्ञानिक जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही यह उत्पादन इकाई प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं कृषि नवाचार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर क्षेत्र के किसानों को दीर्घकालिक लाभ प्रदान करेगी। नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक मुकेश बेलवाल ने कहा कि नाबार्ड ग्रामीण विकास, कृषि नवाचार एवं सतत आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन एवं मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की चुनौतियों को देखते हुए जैव नियंत्रण आधारित तकनीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह उत्पादन इकाई किसानों को गुणवत्तापूर्ण जैव नियंत्रण उत्पाद उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्राकृतिक एवं जैविक खेती को नई दिशा प्रदान करेगी। साथ ही यह परियोजना किसान उत्पादक संगठनों, कृषि उद्यमिता, मूल्य संवर्धन तथा नवाचार आधारित कृषि गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करेगी। किसानों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे सुरक्षित, कम लागत वाली एवं टिकाऊ कृषि व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। विशेषज्ञों ने भी किसानों से जैव नियंत्रण तकनीकों को अपनाने तथा रासायनिक कीटनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग का आह्वान किया‌। उत्तराखण्ड सरकार की किसान हितैषी नीतियों एवं नाबार्ड के सहयोग से स्थापित यह जैव नियंत्रण उत्पादन इकाई भविष्य में नैनीताल सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में प्राकृतिक एवं जैविक खेती के विस्तार का एक अनुकरणीय मॉडल बनेगी। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण तथा आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।

 

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