कांग्रेस कार्यकर्ता जंगलों की आग रोकने को डीएम से मिले

समाचार शगुन हल्द्वानी उत्तराखंड 

वनाग्नि की घटनाओं पर कांग्रेस का प्रशासन को ज्ञापन, प्रभावी रोकथाम की उठाई मांग। जिला कांग्रेस कमेटी नैनीताल के जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल के नेतृत्व में कांग्रेसजनों ने शनिवार को जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल को ज्ञापन सौंपकर पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ रही वनाग्नि की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से फायर सीजन के दौरान जंगलों में लगने वाली आग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कार्ययोजना लागू करने की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि हर वर्ष गर्मियों के दौरान जिले के पर्वतीय क्षेत्रों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे वन संपदा, पर्यावरण, वन्यजीवों तथा ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि और जनजीवन को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार वनाग्नि रोकने के बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
कांग्रेस ने मांग की कि वनाग्नि से निपटने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, वन क्षेत्रों को सेक्टरों में विभाजित कर जिम्मेदारी तय की जाए तथा जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और ग्रामीण जनता की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। साथ ही व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने, जंगलों के भीतर मौजूद तालाबों और वाटर स्रोतों को भरवाने तथा वन्यजीवों और पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करने की भी मांग की गई। हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि भाजपा सरकार वनाग्नि जैसी गंभीर समस्या को लेकर संवेदनशील नजर नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि जंगलों में लगने वाली आग केवल पेड़ों को नहीं जलाती, बल्कि इससे पर्यावरण, जैव विविधता और ग्रामीणों की आजीविका भी प्रभावित होती है। सरकार को केवल घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय प्रभावी और समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए। जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल ने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में वनाग्नि की घटनाएं और गंभीर रूप ले सकती हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता के हितों और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर लगातार आवाज उठाती रहेगी।ज्ञापन सौंपने वालों में हेमन्त बगड़वाल, सतीश नैनवाल, भोला दत्त भट्ट, ललित जोशी, नरेश अग्रवाल, राजेन्द्र खनवाल, सुहैल सिद्दीकी, जिलाध्यक्ष SC विभाग इंदर पाल आर्य, ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप बथयाल, गिरीश पांडे, गोविंद बगड़वाल, जीवन कार्की, जगमोहन चिलवाल, संजय किरौला, नंदन दुर्गापाल, दीप पाठक, संदीप भैसोड़ा आदि शामिल रहे।

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