समाचार शगुन उत्तराखंड
कवि, साहित्यकार, विचारक, शिक्षाविद् रविन्द्रनाथ टैगोर को आज उनकी 85 वीं जयंती पर उनकी कविताओं,साहित्य के साथ याद किये गए।कार्यक्रम की शुरुआत रवीन्द्रनाथ टैगोर के चित्र पर माल्यार्पण से हुई।तत्पश्चात बच्चों ने रविंद्रनाथ टैगोर लिखित गीत यदि तोर डाक शुने केउ ना असे तोबे एकला चलो रे,अगर तुम्हारी पुकार पर कोई न आए, तो तुम अकेले ही आगे बढ़ो का सामूहिक बांग्ला,हिंदी गायन किया। उसके पश्चात उनके जीवन,साहित्यिक कर्म पर बातचीत रखते हुए अंग्रेजी प्रवक्ता नवेंदु मठपाल ने कहा,रवींद्रनाथ टैगोर एक महान कवि, लेखक और दार्शनिक थे। उनका जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। वे एशिया के पहले व्यक्ति थे जिन्हें नोबेल पुरस्कार मिला। वे कम उम्र से ही कविताएँ लिखने लगे। 1913 में उनकी प्रसिद्ध रचना ‘गीतांजलि’ के लिए उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला। भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ उन्होंने ही लिखा है। 1921 में उन्होंने विश्व-भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की। 1915 में अंग्रेजों ने उन्हें नाइटहुड दिया, जिसे उन्होंने 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में वापस कर दिया। 7 अगस्त 1941 को कोलकाता में उनका निधन हुआ। इस मौके पर टैगोर की प्रसिद्ध कहानी पर बनी फिल्म काबुलीवाला भी दिखाई गई। काबुलीवाला 1961 में बनी इसका निर्देशन हेमेन गुप्ता ने किया था और इसमें बलराज साहनी , उषा किरण , सज्जन, सोनू और बेबी फरीदा ने अभिनय किया था। इस मौके पर प्रधानाचार्य मनोज जोशी,नवेंदु मठपाल, हरीश कुमार, दिनेश निखुरपा, संजीव कुमार, जया बाफिला, उषा पवार, हेमलता जोशी, पद्मा, नरेश कुमार मौजूद रहे।



