समाचार शगुन उत्तराखंड
रचनात्मक शिक्षक मंडल की पहल पर सांवल्दे में चल रही शिक्षकों एवं बच्चों की तीन दिवसीय हिंदी भाषा शिक्षण की कार्यशाला के दूसरे दिन बच्चों ने विषय विशेषज्ञ एस सी ई आर टी से सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता मदन पांडे के दिशानिर्देशन में कहानी लिखना सीखा। विद्यार्थियों से उनके विविध जीवन अनुभवों को सुनने की गतिविधि का अभ्यास हुआ। इसमें तीसरी से नवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों ने अपने घरेलू और स्कूली जीवन से संबंधित खट्टे मीठे काफी दिलचस्प अनुभव सुनाये.एक विद्यार्थी ने खेत में भालू से आमना सामना होने का अनुभव सुनाया. एक ने रैली के दौरान अपनी टीम के साथ हुए पक्षपात का किस्सा बताया.कुछ ने रसोईघर के किस्से सुनाए. सत्र संचालकों ने स्पष्ट किया कि स्कूलों में बच्चों के अनुभवों को भाषा में बदलने के अभ्यास कराए जाने चाहिए.पहले इन्हें मौखिक रूप से साझा किया जाना चाहिए, फिर लिखवाया जाना चाहिए। इस तरह कि वे छोटे या बड़े आकार में अपनी स्वतंत्र भाषा में उन्हें लिख सकें.लिखने के दौरान बच्चों को आपसी बातचीत की आजादी देनी चाहिए, शिक्षकों की ओर से टोकाटोकी नहीं होनी चाहिए। तीसरी से पांचवीं कक्षा के 50 से अधिक विद्यार्थियों के साथ सुनकर कहानी लिखने का अभ्यास कराया गया बच्चों ने “बाज और अजगर” की कहानी सुनकर अपने शब्दों में लिखी.कार्यशाला संचालकों का कहना था, लिखे जाने के बाद बच्चों के लेखन को ध्यान से पढ़ा जाना चाहिए. यह देखना महत्वपूर्ण है कि बच्चों ने सुनी गई कहानी को अपने शब्दों में कैसे लिखा. उससे कितनी भाषा ग्रहण की और कितनी कम या अधिक भाषा में उसे लिखा. शिक्षकों द्वारों कहानियों को ध्यान से पढ़ा जाना चाहिए.इनमें आए गलत शब्दों की सूची बनाकर उन पर आगे के अभ्यास एवं गतिविधियां बनानी चाहिए। सायंकालीन सत्र में बच्चों को भाषा में गप्प बनाने की प्राचीन विधा का अभ्यास कराया गया. विषय विशेषज्ञ मदन पांडे ने कहा कि वैसे तो गप्पों को अच्छी निगाह से नहीं देखा जाता लेकिन वास्तव में यह एक पुराना भाषाई कौशल है। इस दौरान नवेंदु मठपाल, सुमित कुमार, रिंकी आर्य, पिंकी, वंदना, अनूप वर्मा, प्रेमा बेलवाल, सविता अग्रवाल, निशि गोयल, मंजू पांडे, केसी त्रिपाठी, चित्रेश त्रिपाठी, दिनेश पांडे, रितु बेलवाल मौजूद रहे।



