समाचार शगुन उत्तराखंड
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च की पूर्व संध्या पर रामनगर के ज्योतिबा फुले सायंकालीन स्कूल पूछड़ी में विभिन्न रंगारंग कार्यक्रमों के साथ महिलाओं के संघर्ष को याद किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए स्कूल संयोजक नवेंदु मठपाल ने महिला दिवस के इतिहास पर चर्चा करते हुए कहा सबसे पहला दिवस, न्यूयॉर्क नगर में 1909 में एक समाजवादी राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया था। 1917 में सोवियत संघ ने इस दिन को एक राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया, और यह आसपास के अन्य देशों में फैल गया। इसे अब कई पूर्वी देशों में भी मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा सार्वभौमिक रूप से सन 1975 से बनाए जाने की परंपरा शुरू हुई।उन्होंने कहा यह दिवस हमें महिलाओं द्वारा समाज में दिए गए योगदान, उनके संघर्ष तथा उनके सामने आने वाली चुनौतियों की याद दिलाता है. स्कूल शिक्षक सुमित कुमार ने कहा सरकार द्वारा नये श्रम कानून लाकर मजदूर महिलाओं की जिंदगी को और भी नारकीय कर दिया है।महंगाई चरम पर है।स्कूल शिक्षिका पिंकी ने कहा युद्ध महिलाओं को सर्वाधिक दर्द देता है हमें आज एक स्वर से दुनिया भर में चल रहे युद्धों के खिलाफ आवाज उठानी ही होगी,हमें एक ऐसे समाज के लिए संघर्ष करना होगा जहां महिलाओं को वास्तव में बराबरी का हक मिले।इस मौके पर स्कूली बच्चों ने इस लिए राह संघर्ष की हम चुनें, हम होंगे कामयाब गीत गाये। इस मौके पर दिव्या आर्य,मंजू देवी,सुनीता देवी, आश्मा जहां,ज्योति देवी,मीना देवी, शांति देवी, गुंजन देवी, गौरा देवी, डोली देवी, आशा देवी, रुखसाना, फरजाना, साईस्ता, समीना मौजूद रहे।



