आनंदा एकेडमी में आनंदम में दिखी भारतीय संस्कृति की अनुपम छटा, बच्चों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

समाचार शगुन हल्द्वानी उत्तराखंड 

 

 

हल्द्वानी। दि आनंदा एकेडमी, डहरिया, हल्द्वानी में बुधवार को विद्यालय का भव्य सांस्कृतिक समारोह ‘आनंदम’ हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ आयोजित किया गया। समारोह का शुभारंभ विद्यालय के प्रबंधक भूपेंद्र सिंह बिष्ट, प्रबंधिका दीक्षा बिष्ट, प्रधानाचार्या माया बिष्ट एवं उपप्रधानाचार्या सुष्मिता बगडवाल द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली मंच संचालन सुश्री सुनीता भाकुनी द्वारा किया गया। समारोह में विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था, पौराणिक कथाओं और आध्यात्मिक विरासत पर आधारित मनमोहक प्रस्तुतियों से उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया। रंग-बिरंगी वेशभूषा, आकर्षक नृत्य, सजीव अभिनय और शानदार मंचीय प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्रीगणेश की वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने हनुमान चालीसा, रामलीला, अयिगिरि नंदिनी, शिव तांडव, दशानन अभिनय तथा ‘माये भवानी’ और ‘शंकरा’ जैसी मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत की अनुपम छटा बिखेरी। वहीं, जगन्नाथ महिमा और कृष्ण लीला की प्रस्तुतियों ने भक्ति एवं आध्यात्मिकता का सुंदर वातावरण निर्मित किया। समारोह में महिषासुर एवं नवदुर्गा, नरसिंह अवतार, पंचतत्व, चार युग, नवरस, शिव-पार्वती और महाकाली जैसी विविध प्रस्तुतियों ने भारतीय पौराणिक परंपराओं और सांस्कृतिक समृद्धि को सजीव रूप में मंच पर उतार दिया। विद्यार्थियों के भावपूर्ण अभिनय, मनमोहक नृत्य, आकर्षक वेशभूषा और आत्मविश्वास से परिपूर्ण प्रस्तुतियों को दर्शकों की खूब सराहना मिली। शिक्षक-शिक्षिकाओं की विशेष प्रस्तुति ने भी कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। ‘आनंदम’ केवल मनोरंजन का माध्यम ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सार्थक प्रयास भी रहा। इस आयोजन ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा निखारने के साथ-साथ आत्मविश्वास, अनुशासन, सामूहिक सहयोग एवं रचनात्मकता का परिचय देने का अवसर प्रदान किया। विद्यालय प्रबंधन ने विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं, कर्मचारियों एवं अभिभावकों का आभार व्यक्त किया।
उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक गौरव से परिपूर्ण इस समारोह का समापन यादगार पलों के साथ हुआ। निस्संदेह, ‘आनंदम’ दि आनंदा एकेडमी परिवार के लिए प्रतिभा, परंपरा, संस्कृति और संस्कारों का एक अविस्मरणीय उत्सव बनकर रहा।