सांवल्दे में भाषा शिक्षण पर दो दिवसीय कार्यशाला शुरू

समाचार शगुन उत्तराखंड 

रचनात्मक शिक्षक मंडल की पहल पर शिक्षकों एवं बच्चों की तीन दिवसीय हिंदी भाषा शिक्षण की कार्यशाला आज रविवार को विधिवत शुरू हुई। ज्योतिबा फुले सावित्री बाई फुले सायंकालीन स्कूल सांवल्दे(पश्चिम) में कार्यशाला की विधिवत शुरुआत बच्चों द्वारा लोक पर्व फूल देई मना कर हुई.कार्यशाला के पहले सत्र में आज शिक्षकों और विद्यार्थियों से उनके पढ़ने लिखने के अनुभवों पर बातचीत की गई। कार्यशाला में बतौर विषय विशेषज्ञ एस सी ई आर टी के वरिष्ठ प्रवक्ता मदन पांडे रहे। बातचीत खासकर भाषा सीखने के उनके अनुभवों पर केंद्रित रही.प्रतिभागियों ने बताया कि बचपन में भाषा सीखने में उन्हें अलग अलग लोगों और कारणों से मदद मिली.कुछ मामलों में परिवारजनों ने भूमिका निभाई कुछ में शिक्षकों ने.अनेक ने बताया कि सीखने के दौरान उन्हें भय अनुभव होता था। अनुभवों का सत्र पूरा होने के बाद मदन पांडे द्वारा भाषा में विभिन्न तरीकों से भाषा निर्माण की गतिविधियों को कराया गया.इनमें एक चीज पर एक वाक्य बोलना,किसी एक चीज पर दो और तीन वाक्य बोलना,किसी वस्तु पर लगातार एक मिनट बोलना तथा एक चीज के पक्ष और विपक्ष में एक ही वाक्य में बोलने के अभ्यास कराए गए.फिर दो दो की टोलियों में किसी वस्तु की प्रशंसा और निंदा में तीन तीन वाक्य बोलने के अभ्यास कराए गए। इन गतिविधियों द्वारा स्पष्ट किया गया कि जब हमारे सामने किसी विषय या वस्तु पर बोलने की चुनौती रखी जाती है तो हमारा दिमाग उसी के अनुसार भाषा खोजने लगता है. मदन पांडे ने कहा भाषा मनुष्य का आविष्कार है.पशु पक्षियों के पास दर्जनों ध्वनि संकेत तो होते हैं पर भाषा नहीं होती.स्कूलों और कक्षाओं में भाषा को सृजनात्मक ढंग से उपयोग करने की जरूरत होती है. बच्चों से जितना अधिक ढांचों ,तरीकों से भाषा निर्माण कराया जाएगा बच्चे उतनी ही अधिक भाषा सीखेंगे। “फुलदेई पर्व” पर बातचीत रखते हुए कार्यशाला संयोजक नवेंदु मठपाल ने कहा यह एक लोकपर्व है.इस त्योहार को फूल सक्रांति भी कहते हैं, जिसका सीधा संबंध प्रकृति से है.चैत्र मास की संक्रांति अर्थात पहले दिन से ही बसंत आगमन की खुशी में फूलों का त्योहार “फूलदेई” मनाया जाता है , जो कि बसन्त ऋतु के स्वागत का प्रतीक है।फूलों का यह पर्व कहीं पूरे चैत्र मास तक चलता है , तो कहीं आठ दिनों तक.कार्यशाला में 50 से अधिक प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला में मदन पांडे,नवेंदु मठपाल,सुमित कुमार,दिनेश पांडे,रिंकी,सुजल कुमार,रितु बेलवाल,पिंकी,जीतपाल कठेत,सुभाष गोला,बालकृष्ण चंद,मुकेश जोशी,दिगम्बर बवाड़ी मौजूद रहे।

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