ढेला में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ मनाई गई उत्तराखंड राज्य निर्माण की रजत जयंती, शहीदों को भी किया गया याद..

समाचार शगुन उत्तराखंड 

राजकीय इंटर कालेज ढेला में उत्तराखंड राज्य निर्माण की रजत जयंती की पूर्व संध्या पर विभिन्न कार्यक्रम सम्पन्न हुए।कार्यक्रमों की शुरुआत शहीदों के चित्रों पर माल्यार्पण से हुई।राज्य आंदोलन के इतिहास पर जानकारी देते हुए अंग्रेजी प्रवक्ता नवेंदु मठपाल ने बताया कि उत्तराखंड के लिए अलग राज्य की मांग कामरेड पी सी जोशी के नेतृत्व में 1952 में उठाई गई। 1973 में गठित उत्तराखंड राज्य परिषद ने इस मुद्दे को उठाया और संघर्ष का मंच बन गया।
जुलाई 1979 में, उत्तराखंड क्रांति दल (U.K.D.) का गठन किया गया, जो इस आंदोलन को राजनीतिक रूप देने वाला पहला राजनीतिक दल था। जीवविज्ञान प्रवक्ता सी पी खाती ने कहा मार्च 1994 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 27% सीटें आरक्षित करने के मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने के निर्णय ने विरोध को और तेज़ कर दिया। एक सितंबर व दो सितंबर 1994 को खटीमा,मसूरी और 2 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर में हुई जघन्य घटनाओं के कारण आंदोलन और अधिक तेज़ हो गया, जिसमें महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जया बाफिला ने कहा उत्तराखंड आंदोलन में महिलाओं का योगदान पुरुषों से कहीं अधिक था। उन्होंने घरेलू काम छोड़कर सड़कों पर उतरकर आंदोलन में भाग लिया। मुजफ्फरनगर कांड के दौरान महिलाओं को रोकने के लिए जघन्य कृत्यों का सहारा लिया गया, और इस दौरान हंसा धनाई और बेलमती चौहान जैसी महिलाएं शहीद हुईं। लंबे और संघर्षपूर्ण आंदोलन के बाद, केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 पारित किया। इसके परिणामस्वरूप, 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड को भारत के 27वें राज्य के रूप में स्थापित किया गया। हरीश चंद्र आर्य और जया बाफिला के दिशानिर्देशों में बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उत्तराखंड आंदोलन के दौर के गीत भी गाए गए। उत्तराखंड केंद्रित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इस मौके पर प्रधानाचार्य मनोज जोशी, हरीश कुमार, सीपी खाती,नवेंदु मठपाल,महेंद्र आर्य,संत सिंह,दिनेश निखुरपा,शैलेन्द्र भट्ट, बालकृष्ण चंद, जया बाफिला,संजीव कुमार, सुभाष गोला राजेंद्र बिष्ट, हेमलता जोशी, मौजूद रहे।

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