समाचार शगुन हल्द्वानी उत्तराखंड
हल्द्वानी में जमीनों के नाम पर करोड़ों की जालसाजी का आरोपी धनंजय गिरी महीनों से फरार है। प्रशासन और पुलिस अपने स्तर पर न सिर्फ मामले की जांच कर रही है, बल्कि धनंजय को सलाखों के पीछे पहुंचाने की जद्दोजहद भी कर रही है। आईजी रिद्धिम अग्रवाल ने इसकी जिम्मेदारी भोटिया पड़ाव चौकी प्रभारी अनिल कुमार को सौंपी थी, लेकिन वह इसमें नाकाम रहे। सामने आया कि दरोगा ने जालसाज से सांठ-गांठ कर ली थी। पूछने पर वह आईजी को भी गुमराह करते रहे और शनिवार को आईजी ने एसआई अनिल कुमार को निलंबित कर दिया।
भोटिया पड़ाव चौकी क्षेत्र के सुभाषनगर आवास विकास में रहने वाले धनंजय गिरी पर विभिन्न थानों में धोखाधड़ी के करीब 9 मुकदमे दर्ज हैं। पिछले वर्ष वह तब चर्चा में आया जब उसने शहर के बीचो-बीच खड़ी एक बेशकीमती प्रॉपर्टी को न सिर्फ कई बैंकों में गिरवी कर रख दिया, बल्कि इसी प्रॉपर्टी में बनी दुकानें भी बेच डाली। इसके बाद से प्रशासन और पुलिस ने धनंजय की घेराबंदी शुरू की, लेकिन तब वह फरार हो चुका था।
इस मामले में अब तक धनंजय से सताए (भूमि धोखाधड़ी) 20 शिकायतकर्ता सामने आ चुके हैं। जिसके बाद प्रशासन की ओर से एसआईटी गठित की गई। साथ ही आईजी रिद्धिम अग्रवाल के निर्देश पर भी एक एसआईटी गठित की गई। इस प्रकरण की जांच भोटियापड़ाव चौकी प्रभारी अनिल कुमार कर रहे थे। अनिल को आईजी ने निर्देशित किया था कि वह एक माह के भीतर धनंजय को गिरफ्तार करें और इस दरम्यान वह लगातार केस की प्रगति उनसे साझा करें। हालांकि जांच अधिकारी ने आरोपी से सांठ-गांठ कर ली। केस की प्रगति पर जब भी आईजी की ओर से सवाल-जवाब किए गए तो दरोगा ने उन्हें भी गुमराह किया। आईजी ने बताया कि विवेचक की मिलीभगत और लापरवाही ने अभियुक्त को बचने का अवसर दिए। जिसके चलते एसआई अनिल कुमार, चौकी भोटियापड़ाव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आईजी रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि धनंजय गिरी प्रकरण में पिछले दो माह के दौरान अभियुक्त धनंजय गिरी से संबंधित कई पीड़ितों ने आईजी कार्यालय में लिखित शिकायतें दी हैं। सभी शिकायतों पर एफआईआर दर्ज की गई है। धनंजय ने धोखाधड़ी से जितनी भी संपत्तियां जोड़ी हैं, सबका लेखा-जोखा तैयार किया जा रही है।



