तीसरे स्मृति दिवस पर याद किए गए कहानीकार शेखर जोशी

समाचार शगुन उत्तराखंड 

रामनगर में कहानीकार शेखर जोशी के स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद लोग।

हिंदी के वरिष्ठ कहानीकार शेखर जोशी को आज शनिवार  चार अक्टूबर को उनकी तीसरी पुण्य तिथि पर उनकी कहानियों के साथ याद किया गया। रामनगर के राजकीय इंटर कालेज ढेला में हुए कार्यक्रम की शुरुआत शेखर जोशी के चित्र पर माल्यार्पण से हुई।अंग्रेजी प्रवक्ता नवेंदु मठपाल ने उनके जीवन पर बातचीत रखते हुए कहा उनका जन्म 10 सितंबर 1932 को अल्मोड़ा जनपद (उत्तराखंड) के ओजियागाँव,सोमेश्वर में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा अजमेर और देहरादून में हुई। इंटरमीडियेट की पढ़ाई के दौरान ही सुरक्षा विभाग में ईएमई अप्रेन्टिसशिप के लिए चयन। सन् 1955 से 1986 तक एक सैनिक औद्योगिक प्रतिष्ठान में कार्यरत रहने के साथ साथ ट्रेड यूनियन मोर्चे पर सक्रिय रहे। तत्पश्चात स्वैच्छिक रूप से पदत्याग कर स्वतंत्र लेखन में जुट गए। उनकी कहानियों पर बातचीत रखते हुए हिन्दी प्रवक्ता पद्मा ने जानकारी दी कि उनके कहानी संग्रह कोसी का घटवार, साथ के लोग, हलवाहा, मेरा पहाड़, नौरंगी बीमार है, और बदबू हैं। एक पेड़ की याद शब्दचित्र संग्रह हैं।फकीरों के शहर इलाहाबाद उनके द्वारा लिखित एक संस्मरण है। नवारुण दिल्ली से उनका से उनका समग्र साहित्य शेखर जोशी कथा समग्र के रूप में प्रकाशित हो चुका है। शेखर जोशी की कहानी गलता लोहा और कोसी के घटवार का वाचन भी बच्चों द्वारा किया गया। उनकी कहानी दाज्यू का फिल्मांकन भी देखा गया।

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