समाचार शगुन उत्तराखंड
नैनीताल जिले में शहादत दिवस की पूर्व संध्या पर शहीद ए आजम भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव को जोतीबा फुले,सावित्रीबाई फुले सायंकालीन स्कूल सांवल्दे रामनगर में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ याद किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,मेरा रंग दे बसंती चोला गीत से हुई. उसके पश्चात् शहीदों के जीवन और क्रांतिकारी गतिविधियों पर बातचीत रखते हुए विद्यालय की शिक्षिका रितु बेलवाल ने कहा हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के प्रमुख सदस्य भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के तीन महान क्रांतिकारी थे.जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद से लड़ते हुए देश की आजादी के लिए बहुत कम उम्र में अपना जीवन बलिदान कर दिया. 23 मार्च 1931 को लाहौर षड्यंत्र केस के तहत ब्रिटिश सरकार ने इन्हें फांसी दी थी। इनकी शहादत को हर साल 23 मार्च को शहादत दिवस’ के रूप में याद किया जाता है। इस मौके पर वरिष्ठ चित्रकार सुरेश लाल द्वारा बच्चों को तीनों शहीदों के चित्र बनाना सिखाया गया. सुरेश लाल किसी भी जीव के चित्र में उसके शरीर के अनुपात को कैसे दर्शाया जाता है एवं रंग संयोजन किस प्रकार किया जाता है के बाबत भी बच्चों को जानकारी दी। इस मौके पर नवेंदु मठपाल, वंदना, पावनी,
सुमित कुमार मौजूद रहे।



